होम्योपैथी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

❣ किसी भी रोग का इलाज करते समय रोग के विभिन्न लक्षणों के साथ जिस दवा के लक्षणों का अधिक मिलान होता हो उसी दवा का उस रोग में पहली बार प्रयोग करना चाहिए। इलाज के लिए दवा की मात्रा जहा तक हो सके कम रखे। मात्रा जितनी कम होगी फायदा उतना ही अधिक होगा और प्रभाव भी अधिक दिनों तक रहेगा।

❣ पुराने (chronic) रोग में दवा दिन में कम बार जबकि नये रोग (acute) में अधिक बार दी जाती है। दवा देने के एक घंटे पहले व बाद तक रोगी को न तो खिलाना चाहिए न ही पिलाना चाहिए।

❣ पुराने रोग में दवा की एक दो मात्रा देने पर सप्ताह भर तक नतीजे की प्रतिक्षा करनी चाहिए यदि फायदा न हो तो दवा की दूसरी पोटेन्सी का प्रयोग करें। यदि 6-7 डोज दवा लेने के बाद भी कोई फायदा नहीं हो तो कोई दूसरी दवा का चयन करें या पहली दवा की पोटेन्सी बदल लें। केवल एक ही दवा से पुराने जटिल रोगों का इलाज सभव नहीं है।

❣ यदि दो-तीन बार दवा लेने से रोग के लक्षण कम हो यानी उस दवा की क्रिया से स्पष्ट फायदा होता दिखाई देता रहे तो उस दवा की दूसरी मात्रा का प्रयोग नहीं करें और न ही दूसरी दवा का चयन करे। यदि किसी दवा से रोग के लक्षण बढ़ जाय तो यह नहीं समझे कि दवा चुनने में भूल हो गई, ऐसे में दो-चार दिन तक दवा बंद कर देने से बढ़े हुए लक्षण अपने आप कम हो जाते हैं और कुछ दिनों में मूल रोग के लक्षण भी खत्म हो जाते है

❣ किसी दवा के सेवन से यदि किसी पुराने रोग के सारे लक्षण एकाएक गायब हो जाय तो यह समझे कि दवा का चुनाव सही नहीं हुआ है। इस ढग से जो रोग घटते हैं यह टेम्पररी लाभ होता है।

❣ प्रायः एक रोग के इलाज में एक बार में एक ही दवा का प्रयोग करे दूसरी बार दूसरी तथा तीसरी बार दवा का प्रयोग कतई नहीं करे ऐसा करने से एक दवा दूसरी दवा के एक्शन में बाधा पहुंचाती है।

❣ पुराने रोग में दवा की पोटेन्सी 1000 (1M) या इससे ऊपर रखें। इसमें जितनी ज्यादा पोटेन्सी होगी उतने ही रोग के जड़ से खत्म होने के आसार बढ़ेंगे। पुराने रोगों में 6, 30 या 200 पोटेन्सी से कोई लाभ नही होगा 100 (C) 500 (D), 1000 (M), 100000 (CM) से दर्शाते हैं ।

❣ जब अच्छी तरह चुनी हुई दवा से फायदा न हो तो उस समय एकाएक दवा को न बदलकर केवल उस दवा की पोटेन्सी बदलने से ही फायदा हो जाता है। जैसे पहले अधिक पोटेन्सी का प्रयोग किया और फायदा नहीं हुआ तो दूसरी बार मीडियम पोटेन्सी फिर अत में कम पोटेन्सी का प्रयोग करें।

❣ यदि कोई दवा पानी में मिलाकर बनाई हुई हो तो सुबह सेवन करते समय दवा की शीशी का पैदा हाथ के ऊपर 5-6 बार जोर से ठोक लें, इससे इसकी पोटेन्सी में कुछ परिवर्तन होने से अधिक लाभ होता है।

❣ मनुष्य में दवा सेवन करते समय सुगधित | चीजें, सड़े और जल्द पचने वाले पदार्थ, गरम मसाले, प्याज, लहसुन कपूर, शराब, नशीले पदार्थ, धुम्रपान ज्यादा फल-फूल, चाय, कॉफी आदि उत्तेजक पदार्थो का प्रयोग नहीं करना चाहिए और चूंकि ये सभी चीजे पशु प्रयोग में नहीं लेता है इसलिए होम्योपैथी दवाइयों का असर पशुओ में बहुत अच्छा होता है।

❣ कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मुह से दवा लेते समय शरीर के बाहर दवा नहीं लगानी चाहिए क्योकि भीतरी दवा का परिमाण कम जबकि बाहर लगाई जाने वाली दवाइयों का परिमाण अधिक होता है जिससे भीतर की दवा की क्रिया खत्म हो जाती है लेकिन इस मान्यता के विरुद्ध कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ रोगों में भीतरी व बाहरी दवा सेवन से रोग जल्दी घटता है, लेकिन जो भीतरी रूप में काम में लेते है उसी दवा को बाहर लगानी चाहिए।

❣ दवा की पोटेन्सी Daynamization, Potentization, Attenuation, Dilution, Strength or Potency कहते है। विभिन्न स्त्रोतो से बनाई गई दवाइयों की मूल दवा मदर टिचर होती है जो बहुत कन्सन्ट्रेट रूप में होती है और इसे 0 से दर्शाते हैं दवा के मदर टिंचर के एक भाग को 99 माग एल्कोहोल में मिलाने से पहली पोटेन्सी तथा इसके एक भाग को 99 माग एल्कोहोल में मिलाने से 2 (दूसरी) पोटेन्सी बनती है। इस प्रकार क्रमश एक लाख पोटेन्सी तक दवा तैयार की जाती है। इसमें पोटेन्सी जितनी ज्यादा होगी उसमें मूल दवा का अश भी उतना ही कम होगा, लेकिन उसका एक्शन तेज और बहुत दिनों तक स्थायी रहता है।

❣ इसी प्रकार बायोकैमिक पद्धति में एक भाग मदर टिंचर को 9 भाग दूध की चीनी के साथ खरल करने पर 1x पोटेन्सी तैयार होती है। इसमें 1 भाग को 9 भाग दूध की चीनी में घोटने से 2x पोटेन्सी और इसी प्रकार क्रमश 12x, 30x तथा 200x की दवाइया तैयार की जाती है।

❣ जिस कमरे में होम्योपैथिक दवाइया रखे वह स्थान सूखा, साफ, उजालेदार हो तथा ऐलोपैथिक दवाइया, कपूर, नैप्थेलीन, युकेलिप्टस आदि की तेज गंध वाली चीजों के पास नहीं रखें। जब भी कमरे को फिनाइल से धोए होम्योपैथिक दवाएं वहां से हटा दे।

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