हृदय रोग Heart Diseases

हृदय रोग (Heart Diseases)

1. उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

हमारे शरीर में धमनी या शिरा द्वारा रक्त पूरे शरीर में संचालित होता रहता है। किन्हीं कारणों से धमनियों के मोटे हो जाने पर रक्त संचालन में बाधा उत्पन्न होने लगती है। तब हृदय को अधिक दबाव देकर रक्त को सारे शरीर में पहुँचाना पड़ता है, इसे ब्लड प्रेशर कहते हैं। हृदय सम्बन्धी बीमारियों के मुख्य लक्षण हृदय में पीड़ा, हृदय के दौरे का मुख्य लक्षण है, इसे एंजाइना कहते हैं। दूसरा लक्षण है- दिल की तेज एवं बढ़ी हुई धड़कनें, इसके अलावा लेटने में साँस लेने में कष्ट होना, साँस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना, चेहरे पर पीलापन, धीमी नाड़ी गति तथा उल्टी महसूस होना। हाथ-पैर में नीलापन आ जाना आदि, इस रोग के प्रमुख लक्षण होते हैं।

उपचार

(a) रावलफिया सरपेन्टिना क्यू- उच्च रक्तचाप की बहुत लाभकारी दवा है।

(b) सैगुनेरिया कैन 200- वृद्ध स्त्रियों के रक्तचाप की उत्तम औषधि है।

(c) फॉस्फोरस 200- रोगी को नमक खाने की तीव्र इच्छा होती है।

(d) वेराइटा म्यूर 200- गुर्दो की खराबी के कारण विशेषकर बूढ़े लोगों के लिए लाभकारी दवा।

(e) औरम मेटालिकम 200, 1000- यदि रोगी में आत्महत्या करने की इच्छा बार-बार उठती हो।

(f) जैल्सीमियम- चिन्ताजनक समाचार सुनने से आघात के कारण।

(g) कैटिगस क्यू- डिस्टोलिक प्रेशर बहुत ज्यादा हो तथा सिस्टेलिक प्रेशर बहुत कम हो जाये तब यह बहुत उपयोगी दवा है। क्रोटेगस क्यू की 10 बूंद दिन में दो बार लेने से दिल की धड़कन ठीक होती है।

(h) बेलाडोना 200, 1000- सिर में चक्कर, आँखों में लाली, कनपटियों में टपकने जैसा दर्द होता हो।

(i) कोनियम 200- मस्तिष्क में बहुत ही कमजोरी महसूस होती हो, खड़े होने पर पैर कांपते हों, सिर में भारीपन महसूस होता हो।

(j) ग्लोनापिन 200, 1000- आँखों में चिंगारियाँ, श्वास कष्ट हृदय की धड़कन, धूप में रोग का बढ़ना।

(k) हीमोटोक्सी लोन- छाती में जकड़न, उक्त दवा 3X शक्ति की लेनी चाहिए।

नोट- शवासन उच्च रक्तचाप में बहुत ही सहयोगी आसन है।

2. निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure)

जब हृदय से धमनियों में प्रवाहित रक्त का दबाव कम होने लगता है और सामान्य से भी कम हो जाता है, तब इसे निम्न रक्तचाप कहते हैं। इसमें मितली महसूस करना, कम्पन की अनुभूति तथा कभी-कभी बेहोशी की भी संभावना होती है। होमियोपैथी में विस्कम एल्वम, डिजीटेलस एड्रीनेलीन 6 निम्न रक्तचाप की उत्तम औषधियाँ मानी गयी हैं। कम रक्तचाप में मरीज को तुरन्त लिटा दें, सिर को तकिया न लगायें।

(a) चायना 30- रक्त दस्त उल्टी का स्राव अधिक हो जाने पर इसका प्रयोग करें।

(b) कार्बोवेज 6, 30- दुर्बलता, पेट में गैस, खुली वायु का ज्यादा पसन्द होना।

(c) नेट्रम म्यूर 30- धूप सहन नहीं होती है। ज्यादा नमक खाने की इच्छा होती है।

(d) कैलकेरिया फास 6- वृद्ध लोगों की कमजोरी में निम्न रक्तचाप की बढ़िया दवा है।

(e) विस्कम एलवम 6- नब्ज धीमी, दिल पर बोझ-सा रखा मालूम पड़ता है।

(f) क्रैक्टस ग्राण्ड फ्लोरम 6- लेटने पर भी चक्कर का आना, हृदय को जकड़ लेने जैसी अनुभूति का महसूस होना।

3. हृदय शूल (Angina Pectoris)

कुछ समय के लिए हृदय में तेज. दर्द महसूस होता है, जो हाथों तक जाता महसूस होता है। हृदय सिकुड़ता हुआ महसूस होता है और दम घुटने लगता है।

उपचार

(a) ग्लोनाइन 200- यदि सिर में भी तेज दर्द उठ रहा हो।

(b) टेवेकम 200- यदि हृदय शूल शारीरिक परिश्रम अथवा किसी सदमा के कारण हो रहा हो।

(c) अर्जेन्टम नाइट्रिकम 200- जब खाना खाने के बाद हृदय शूल महसूस होता हो।

(d) नाजा 200- बायें हाथ का सुन्न सा हो जाना।

(e) स्पाईजिलिया 200- बायीं ओर तीव्र दर्द होता हो, तेज धड़कन।

(f) डिजिटेलिस 30- धीमी नाड़ी बेहोशी सी हालत, आँख, पड़ना। नाखून नीले

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