हड्डियों के रोग और जोड़ों के दर्द

(Bones, Jonts and Muscular Pains)

1. सन्धि शोथ (Arthritis)

इसे बीमारी में सन्धियों का शोथ एवं अँगुलियों, कलाई, घुटने, कंधे में सूजन आ जाती है। यह रोग बहुत ही पीड़ाजनक होता है। इस रोग के लिए निम्न दवायें हितकारी मानी गयी हैं-

(a) गुलथेरिया क्यू- इसकी मालिश करने से जोड़ों में आराम मिलता है।

(b) कोलोफाइलम 200- छोटे जोड़ों के दर्द में प्रभावी दवा है।

(c) मोरगन बेसिलस 200- सन्धियों के शोथ को ठीक करने से सहायक। आरथ्राइटिस के प्रमुख लक्षणों में सूजन, दर्द एवं अकड़न रहता है तथा उनका हिलाना डुलाना मुश्किल हो जाता है। लेटने के बाद उठने पर जोड़ों में अकड़न मालूम पड़ती है। जोड़ों के साथ मांसपेशियों में भी कमजोरी आने लगती है तथा हाथों के पकड़ने की आदत कमजोर होने लगती है।

2. गठिया (Gout)

शरीर की छोटी-छोटी सन्धियों के आक्रान्त होने पर उसे गठिया कहा जाता है। खून में यूरिक एसिड मौजूद होता है। अकसर अधिक उम्र वालों को यह बीमारी हो जाती है।

उपचार

(a) पल्सेटिला 30- दर्द जब एक सन्धि से दूसरी सन्धि में आता जाता है।

(b) कोलचिकम 30- चलने फिरने वाला दर्द, कभी-कभी एक सन्धि से दूसरी सन्धि में चला जाता है।

(c) आर्निका 30- सन्धियों में कुचलने जैसा तीव्र दर्द होता है।

(d) एकोनाइट 30- तेज बुखार प्यास बेचैनी तथा मानसिक कष्ट।

(e) कल्केरिया कार्ब- ऋतु परिवर्तन के कारण रोग का बढ़ना। गठिया के लक्षण- जोड़ों में दर्द, अकसर सुबह शाम अकड़न, जोड़ बड़े हो जाते हैं या उनमें सूजन आ जाती है। जोड़ के आसपास गर्माहट रहती है।

3. मांसपेशियों का दर्द (Myalgia)

इस बीमारी में निम्नलिखित औषधियाँ बड़ी कारगर होती है।

(a) एक्टिया रेसिमोसा 200- मांसपेशियों के दर्द के लिए बहुत ही प्रभावी औषधि मानी गयी है।

(b) अर्निका 200- मांसपेशियों में दर्द की अधिकता हो और ऐसा प्रतीत होता हो कि किसी ने कुचल दिया हो।

4. वात रोग (Rheumatism)

बड़े जोड़ों, मांसपेशियों एवं पुट्ठों में होने वाले दर्द को वात रोग कहते हैं। प्रायः जोड़ विकृत हो जाते हैं, इस लक्षण के कारण इसे रूमेटाइट सन्धिशोथ कहते हैं।

उपचार

(a) रस टाक्स 200- वर्षा से वातरोग, ठण्ड में घूमने से, वर्षा ठण्ड एवं नमी के कारण वातरोग।

(b) ब्रायोनिया एल्वा 30- कब्ज के साथ दर्द हिलने से बढ़ता है गर्म, प्यास अधिक।

(c) कास्टिकम 200- वृद्धावस्था में लाभकारी औषधि है।

(d) लाइकोपोडियम 30- अँगुलियों एवं जोड़ों में तीव्र दर्द होता है। शाम 4 बजे से 6 बजे तक दर्द बढ़ने लगता है।

(e) फाइटोलेक्टा- वातजनित दर्द, कमर में दर्द सबेरे बढ़ता है।

(1) लिडम पाल 200- जब दर्द ऊपर की तरफ बढ़े, बर्फ तथा ठण्डे पानी लगाने से घटता हो।

(g) सिमिसिफ्यूगा 200- बड़ी उम्र की औरतों में प्रधान उपचारक शक्ति।

(h) पल्सेटिला 30- रोने जैसी अवस्था में स्त्रियों को होने वाली दर्द का सेक कराने से घटता है प्यास नहीं लगती।

(i) मर्क सोल 30- दर्द रात में बढ़ता है, फ्लू के बाद वातरोग।

(i) डल्कामारा 30- मौसम के परिवर्तन से प्रभावित, भीगने पर ठण्ड लगने

(M) मेडोरिनम 200, 1000- परिवार में गठिया या वातरोग होने पर इसका प्रयोग किया जाता है।

5. अस्थिभंग (Fracture)

हड्डी को टूटने को अस्थिभंग कहते हैं।

(a) सिम्फाइटम 200- हाथों और अँगुलियों का अस्थिभंग, इसे कुछ सप्ताह तक लें।

(b) रूटा 200- जब कलाई के जोड़ की हड्डी टूट गयी हो या खिसक गयी हो।

(c) आर्निका 200- अस्थिभंग होने की बढ़िया दवा।

6. लकवा (Paralysis)

अंगों में संचालक शक्ति की कमी का होना, जिस अंग में लकवा हो जाता हैं उसमें शक्ति नहीं होती न गति होती है।

उपचार

(a) एकोनाइट नेप 30

(b) रस रेडिकन्स- निम्न अंगों का लकवा।

(c) एल्यूमिना 200- पेशियों की पक्षघातिक दशा, एड़ियाँ सुन्न हो जाती है।

(d) जेल्सेपियम 200- सारे अंग शिथिल पड़ जाते हैं, उनमें सुन्नपन,

मांसपेशियों की शिथिलता तथा अंगों में समन्वय शक्ति का अभाव।

(e) प्लम्वम मेट 200- किसी एक पेशी विशेष में पक्षाघात।

(f) हाइपेरिकम 200- चेहरे के पक्षाघात के लिए उपयोगी दवा होती है।

7. पोलियो (Poliomyelitis)

यह संक्रामक रोग माना जाता है। इसमें पोलियो विषाणु का संक्रमण होता है यद्यपि यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। किन्तु रोगी के हाथ और पाँव इस रोग से ज्यादा ग्रस्त होते हैं।

(a) केलिफास 61- यह बायोकैमिक दवा है तथा लाभकारी है।

(b) जेल्सीमियम 200- मांसपेशियों की शिथिलता, प्यासहीन ज्वर, अत्यधिक कमजोरी, अधिक मात्रा में पेशाब का होना. एड़ियाँ फर्श को स्पर्श नहीं करती।

(c) कास्टिकम 1000- मांसपेशियों की शक्ति में कमी, अंधेरे और एकान्त में भय, अंगों का टेढ़ापन कमर घुटनों एवं पैरों में कष्ट की तीव्र अनुभूति।

(d) लेथाइरस सटाइवस 200- शरीर के निचले भाग में पक्षाघात, अँगुलियों की नोंक सुन्न निम्न शरीर के अंगों का सूख जाना। टौंगों में अत्यधिक कड़ापन, एड़ियाँ फर्श को स्पर्श नहीं करती है, जीभ सूखी, पैरों में ऐंठन तथा कंपन जो ठण्ड से बढ़ने लगता है।

8. अस्थिशोथ (Rickets)

बच्चों में पोषण तथा विटामिन-डी की कमी से बच्चे दुर्बल तथा हाथ-पैर की हड्डियाँ पतली हो जाती हैं।

(a) एब्रोटेनम 30- बड़ा पेट पतले घुटने।

(b) साइलेशिया- पैरों में पसीना, पेट बड़ा हो जाता है, दुर्गन्धित दस्त।

(c) आर्सेनिक आयोड 6- जीर्ण शरीर, माथा बड़ा तथा पेट भी बड़ा दिखायी देता है। बच्चे बहुत ही दुर्बल दिखते हैं।

(d) कैल्केरिया कार्व 30- सिर में पसीना, पतले दस्त, ठण्ड लगना, कमजोरी, जीर्ण शरीर का होना।

9. साइटिका (Sciatica pain)

इसका दर्द नितम्ब से शुरू होकर नीचे की ओर पैरों तक उतरता है। यहाँ पर साइटिक नर्व होती है। अतः इसमें होने वाली पीड़ा को साइटिका दर्द कहते हैं। इसे गृधसी वात भी कहते हैं।

(a) एमोनम्यूर 3x- बैठे रहने से दर्द बढ़ जाता है। चलने-फिरने से कम होता है। बैठ जाने से दर्द बिल्कुल बन्द हो जाता है।

(b) रसटक्स 3- गीला वस्त्र पहनने से गीलेपन के कारण दर्द उत्पन्न होने पर इसका प्रयोग करें।

(c) मैग्नेशिया फास 2x- बिजली लगने की तरह दर्द का होना।

(d) लाइकोपोडियम 12- दाहिने अंग का वात।

(e) कोलोसिन्थ 3- इस रोग की बढिया दवा, दर्द एकाएक पैदा होना और एकाएक खत्म हो जाना।

(f) नेफेलियम 30- स्नायुओं में तेज दर्द, ऐंठन और तीव्र वेदना होती है। सल्फर 200 पुराने रोगियों के लिए लाभकारी होता है।

10. कमर दर्द

कमर दर्द का मुख्य कारण गलत ढंग से बैठना, खड़े होना, सोना एवं गलत ढंग से झुककर सामान उठाना है। आप हमेशा सीधे बैठने की आदत डालें, रीढ़ और कमर पर कहीं से झुकाव नहीं होना चाहिए।

(a) जिंकम नेट- कमर दर्द, छूना भी पीड़ादायक, कन्धों में तनाव, कन्धों में टूटन ऐंठन, यह दवा 30 शक्ति में देनी चाहिए। स्त्रियों में भी मासिक स्राव के समय भयंकर कमर दर्द होता है उनके लिए सीपिया, एल्युमिना उपयुक्त औषधि है।

(b) ब्रायोनिया 30- दिन में 3-4 बार एक हफ्ते तक ले सकते हैं।

(c) कालीकार्व 30- इसे लेने के बाद दो-तीन खुराक 200 शक्ति की भी ले सकते हैं।

(d) कास्टिकम 30- इस पीड़ा में लाभकारी औषधि होती है।

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Pradeep Kumar
Pradeep Kumar
2 months ago

Sir Mere PitaJi Ke Pair Ke Neeche Heel Ke Pass Gatte Ki Haddi Kaafi Bad Gayi Hai & Pain Bhi Kaafi Hota Hai
Please Tell Me Best Medicine
🙏

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