सिर के रोग

सिर के रोग : पहले सिरदर्द के कारण का निदान आवश्यक होता है।

1. सिरदर्द (Headache): की अनेक दवायें हैं जिनमें प्रमुख हैं-

(a) व्रायोनिया 30- कब्ज के कारण जब धीरे-धीरे सिरदर्द होता हो तो रोगी चुपचाप लेटना पसन्द करता है। हिलने-डुलने से रोग बढ़ता है प्यास ज्यादा लगती है।

(b) ग्लोनाइन 200- धूप या गर्मी के कारण सिरदर्द होता है। सिर अत्यधिक भारी महसूस होता है।

(c) लैकेसिस 200- पुराना आधा सीसी के (Migrane) की यह बड़ी असरकारी महौषधि है।

(d) सीपिया 200- बायीं तरफ दर्द होता है। वाली तरफ लेटने से दर्द बढ़ता है।

(e) काल्मिया 30, 200- सुबह सिरदर्द का शुरू होना तथा सूर्यास्त के समय समाप्त हो जाना।

(1) नैटूमम्यूर 30, 200- इसका सिरदर्द 10 बजे प्रारम्भ होता है, दोपहर में शिखर पर पहुँचकर सूर्यास्त के समय समाप्त हो जाता है।

(g) एकोनाइट 30- सिर में अत्यधिक भयंकर पीड़ा तथा भारीपन, खड़े होने पर सिर में चक्कर आना।

(h) वेलाडोना 30, 200- सिर फटने जैसा अनुभव होता है। शोर अच्छा नहीं लगता प्यास ज्यादा लगती है।

(i) सिमिसिफ्यूगा 200 ऋतुधर्म में गड़बड़ी होने के कारण होने वाले सिरदर्द में लेना चाहिए। इसके साथ कालीफास 30 दिन में 4 बार लें।

5) कैलीफास जेसीमियम वाले रिचाना 30 और एसिडफास 30- प्रर्याय क्रम में देने से तनाव तथा चिन्ता के कारण उत्पन्न सिरदर्द में लाभ होता है।

(४) उच्च रक्तचाप के कारण राउवोल्फिया क्यू +क्रेटेगस क्यू +पैसीप्लोरा क्यू (1:1:1) पानी में 8-10 बूंद भोजन के बाद लें।

निम्न रक्तचाप में चायना 30+कार्बोवेज 30 का लेना लाभप्रद होता है।

2. सिर में खुश्की (Dandrufl) : सिर में बालों के नीचे सफेद परत सी जमना, इसे रूसी या फरास कहते हैं।

(a) फॉस्फोरस 200- सिर में फरास का होना।

(b) थूजा 30- फरास की सफेद परतें, बालों में सूखापन तथा बालों का अधिक गिरना।

(c) सल्फर 30- फरास के साथ बहुत खुजली का होना।

3. केशों का झड़ना : इसमें निम्न 4 दवायें बहुत अधिक लाभकारी सिद्ध होती है।

(a) चायना 30- कोई रोग होने के बाद केशों का झड़ना।

(b) लाइकोपोडियम 30- सिर के ऊपरी भाग का गंजा हो जाना।

(c) टेल्यूरियम 30- सिर में दाद के कारण बालों का झड़ना।

(d) सेलेनियम 30- कंघी करते समय बालों का अधिक झड़ना। इसे अथवा फास्फोरस 30 शक्ति की 4-4 गोली दिन में 3 बार लें।

4. सफेद बाल (Premature-grey hair)

(a) लाइकोपोडियम 30- कम उम्र में केशों का पकना।

(b) थूजा 30- टीके के बाद बालों का सफेद होना।

(c) विस बेडन 200- शक्ति में एक हफ्ते में एक दिन (एक बूंद सुबह, एक बूँद शाम) का प्रयोग करें।

(d) साइलेशिया दवा- 12X शक्ति में प्रतिदिन 4-4 गोली दिन में तीन बार खायें। इसे कम से कम 6 माह तक प्रयोग करना चाहिए। बालों का झड़ना, गंजापन तथा सफेद होने के लिए हमारा खान-पान तथा रहन-सहन भी उत्तरदायी होता है। अतः उसमें आवश्यक सुधार करना आवश्यक है। मालिश के लिए नारियल, सरसों, जैतून या बादाम का तेल लाभकारी होता है। कृत्रिम रजंकों (डाई) शैम्पू तथा साबुन का यथा सम्भव अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए। प्रायः यह भी देखा गया है कि अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण भी बाल झड़ने एवं सफेद होने लगते हैं। हारमोन का असन्तुलन एवं रक्ताल्पता (एनीमिया) भी इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है।

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