मानसिक रोग Mental Diseases

मानसिक रोग (Mental Diseases)

आधुनिक युग में मानसिक रोगों में बड़ी ही तेजी से हो रही है। यह पुरुषों तथा स्त्रियों में तेजी से बढ़ रहा है। इसकी तेजी की दशा का कारण प्रमुख रूप से हमारी गलत जीवनशैली तथा गलत खान-पान है। हमारा सामाजिक ढाँचा काफी हद तक सीमित और संकुचित हो गया है और हममे श्रेष्ट गुणों जैसे दया, प्रेम, करुणा, मित्रता एवं सौहार्द जैसे गुणों का अभाव होता जा रहा है। इसके कारण मानसिक रोगों में अतिवृद्धि होती जा रही है। हम यहाँ प्रमुख मानसिक रोगों तथा उसके लिए असरदार होमियोपैथी की दवाओं का वर्णन कर रहे हैं।

(a) अवसाद (Depression)- ऐसे व्यक्ति में सोचने में कठिनाई होने लगती है, उसमें निराशा की प्रवृत्ति की बढ़ोत्तरी हो जाती है। रोगी चुप और शान्त रहता है। उसका चेहरा उदास, भावहीन, अस्थिर और अवसाद से घिरा हुआ होता है। वह अपनी आयु से बड़ा मालूम होता है तथा चलना, फिरना, दौड़ना भागना इस प्रवृत्ति से विरत रहता है। ऐसे रोगी में कई भ्रम भी पाये जाते हैं जैसे-

(b) रोगी भ्रम (Hypochondriac)- ऐसे व्यक्ति में अपने स्वास्थ्य एवं अपने रोगों की वृद्धि के सम्बन्ध में चिन्तायें बहुत ही अनावश्यक रूप से बढ़ जाती है। ठीक होने के बाद भी वह सोचता है कि वह ठीक नहीं है। उसके स्वास्थ्य में कहीं कोई गड़बड़ी जरूर है।

(c) स्वयं को अपराधी मानने की प्रवृत्ति- ऐसा व्यक्ति बात-बात में अपने को अपराधी एवं स्वयं को उत्तरदायी मानने लगता है। जैसे मैं पापी हूँ. मैं बुरा हूँ, समाज के लिए बोझ हूँ।

(d) आकुलता (Anxity) का बहुत अधिक होना- उदासी के कारण उसमें आकुलता भी बहुत अधिक होती है। चिड़चिड़ा, अजनबीपन का भाव. हीनता का भाव अधिक रहता है। ऐसा रोगी सबके प्रति शंकालु हो जाता है। हर व्यक्ति को वह अपना शत्रु-सा मानने लगता है, वह सोचता है कि कोई व्यक्ति उसका पीछा कर रहा है अथवा हानि पहुँचाने की चेष्य कर रहा है। ऐसे व्यक्ति सदा काल्पनिक भय के शिकार रहते हैं।

इस रोग की प्रमुख बवाइयाँ

(a) इग्नेशिया 200, 1000- प्रेम में असफल होने से उदासी, अपमान, किसी निकटतम सम्बन्धी की मृत्यु, अपना दुःख दूसरों से प्रकट न करना।

(b) सीपिया 1000- अरुचि की भावना, मित्रों परिवारजनों, सम्बन्धियों एवं स्वयं के जीवन के प्रति अरुचि का भाव, कामवासना की कमी, ऐसी स्त्री विषाद से भरी हुई होती है तथा सोचती है कि वह कभी रोग मुक्त नहीं हो सकेगी।

(c) लेकेसिस 200- ऐसी महिलायें माहवारी बन्द होने के पश्चात् उदासी से ग्रस्त हो जाती है। उसे किसी काम में मन नहीं लगता है। जिन्दगी से थका-थका अनुभव करती है। उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति भी पायी जाती है।

(d) नेट्रम म्यूर 200, 2000- रोगी रोना तो चाहता है पर रोने में असमर्थ सा होता है। एक बात को बार-बार सोचता है। प्यास अधिक, ठण्ड अधिक लगना, खुली हवा प्रिय, अनिर्णय की भावना।

(e) कैलकेरिया कार्ब 200- छोटी-छोटी बातों के बारे में हमेशा सोचते रहना। नींद की कमी, परिवार के प्रति उदासीन, भयभीत रहना।

(f) एसिड फास 30, 200- अति संताप तथा पीड़ा के फलस्वरूप रोगी भारी विरक्ति का शिकार होता है। किसी कार्य में रुचि नहीं होती. स्मरण शक्ति की कमी होती है।

(g) एनाकार्डियम आरियेन्ट 200- बुढ़ापे में उदासी और घोर शिथिलता, बार-बार खाना खाने की आदत बुढ़ापे में होना, आशंका से भरा व्यक्ति मानो कोई उसका पीछा कर रहा हो।

(h) पल्सेटिला 1000- भावुकता का आधिक्य ऐसे व्यक्ति बात-बात पर रोने लगते हैं।

(i) कालीफास 61- कार्य सम्बन्धी उपेक्षाओं और चिन्ताओं से ग्रस्त व्यक्ति, निरन्तर उदासी बनी रहती है।

(j) मास्कस 30, 200- रोगी कष्ट की तो बात करता है, पर खोजने पर उसके रोग और कष्ट का-पता नहीं चल पाता है।

(k) औरममेट 200, 100- आत्महत्या की तीव्र इच्छा, चिड़चिड़ापन, अपने को निरन्तर दोषी एवं गुनाहगार मानना तथा धिक्कारना।

2. खण्डित मानसिकता (Schizophrenia)

इस रोग में होमियोपैथी की दो दवायें विशेष उपयोगी होती हैं।

(a) नेट्रम म्यूर 1000- रोगी एक ही बात को बार-बार दोहराता रहता है। प्यास की अधिकता, नमक खाने की तीव्र इच्छा का होना।

(b) एनाकार्डियम ओरिएण्टल 200- रोगी को विरोधी भावनाएँ घेरे रहती हैं। एक भावना उसे किसी काम को करने को प्रेरित करती है। जबकि दूसरी भावना काम करने को रोकती है, वह खण्डित मन वाला होता है।

3. मिर्गी (Epilepsy)

यह एक मानसिक रोग माना जाता है। इसमें प्रायः स्मृति लोप हो जाती है। शून्यता का भाव पसीना आना, लार गिरना, मूर्छा, मुँह से वस्तु का गिर जाना तथा लड़खड़ाते हुए जमीन पर गिर पड़ना, इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

उपचार

(a) ओपियम 30- भय के कारण मिर्गी।

(b) होपोसायमस 200- चीख के साथ एकाएक मिर्गी की दौरा।

(c) कुप्रेम मेट 6, 30, 200- सोये रहने पर मिर्गी का दौरा। अचानक दौरा आने पर चीख के साथ गिर पड़ना, मुँह में झाग, होंठ नीले, तेज दर्द,

निम्नशक्ति की दवा से धीरे-धीरे उच्चक्रम की दवा दें।

(d) औनेन्या क्रोकेटा 12, 30- एकाएक एवं पूर्णतः अचेतनपन, मुँह से झाग, चेहरा पीला, हाथ-पैर ठण्डे।

(e) इग्नेशिया 200 1M- भय, शोक तथा प्रियजनों के बिछोह आत्मग्लानि एवं प्रेम में धोखा, बच्चों को मारने-पीटने पर दौरे।

(f) सिमिसीफ्यूगा 200- मासिक धर्म के दिनों में मिर्गी का दौरा पड़ना।

(g) कालीवार्ड क्रोम 200- अमावस्या के समय मिर्गी के दौरे।

(h) साइलेशिया 1M, 10M- पूर्णिमा या इसके आसपास मिर्गी आना।

(i) साइक्यूटा विसेसा 200- भयभीत होने से सिर में चोट मिर्गी आना. चिल्लाना, घिधियाना, कराहना. जबड़े अकड़ना आदि लक्षणों में दौरे।

4. उन्माद या मूर्छा (Hysteria)

यह पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक पायी जाती है। इसमें भी अकसर मिर्गी के समान दौरे पड़ते हैं। केवल अन्तर इतना होता है कि मिर्गी में चेतना नहीं रहती, जबकि इसमें रहती है। अविवाहित युवतियों में इस बीमारी का होना प्रायः अधिक पाया जाता है। इसमें स्त्री बेहोश होकर काँपने लगती है। शरीर अकड़ने लगता है। हिस्टोरिया रोग में प्रायः आसक्ति और कामवासना का दमन भी कारण बन जाता है।

उपचार

(a) कानियम 1000- अविवाहित स्त्रियों तथा ऐसी स्त्रियाँ जो तलाकशुदा होती हैं। उनमें कामवासना के दमन के कारण उत्पन्न हिस्टीरिया में।

(b) प्लेटिना 200- दूसरों को घृणा से बार-बार देखने के कारण।

(c) इग्नेशिया 200- प्रेम से वंचित होना, कामेच्छा का दमन, हिचकी, उल्टी, निराशा, रोना।

(d) नेट्मम्यूर 1M- मासिक धर्म देर से या कम आने पर दौरा पड़ना, पसीना आने पर रोग का घटना।

(e) कालीफास 30, 6X- भावुकता या घबराहट के कारण दौरा पड़ना।

(f) बेलाडोना 1000- थरथराहट, जलन, गर्मी, लाली, भूतप्रेत का डर।

(g) मास्कस 200- बार-बार मूर्छा का होना, हृदय में धड़कन का अधिक होना।

5. पागलपन (Insanity)

इस बीमारी में भी होमियोपैथी की दवाओं का बहुत असर देखा गया है। इस रोग में इसकी प्रमुख दवायें निम्न हैं-

(a) हायोसायमस 200, 1 एम- गुप्तांगों पर हाथ रखना, बार-बार नंगा हो जाना. हँसना, चिल्लाना, बहकी-बहकी बातें करना, ईर्ष्यालु, शंकालु. औषधियों का सेवन नहीं करना चाहता है, बड़बड़ाता रहता है। काल्पनिक शत्रुओं को दूर भागने की चेष्टा करता है।

(b) थूजा 1000- टीका (Vaccination) के दुष्प्रभाव के परिणाम स्वरूप पागलपन होने पर।

(c) कैनाविस इण्डिका-हँसना आरम्भ करे तो हँसता ही रहता है। अंगुलियाँ नचाता रहता है। आनन्ददायक बातों में रुचि दूरी और समय का ज्ञान बिल्कुल नहीं।

(d) स्ट्रामोनियम 200- अति क्रोधित स्वभाव वाला, मौत का हमेशा डर, सदा हँसता रहता है। सौगन्ध बहुत खाता है। कपड़े फाड़ देना, सीटी बजाने जैसी हरकतें करता है।

(e) एनाकार्डिएम 1000- बात-बात पर सौगन्ध खाने की आदत से ग्रस्त।

(f) प्लेटीना 1000- अपने को बहुत बड़ा सोचे तथा दूसरे को बहुत छोटा समझे, अति घमण्डी स्वभाव वाला, भ्रान्तियों से घिरा हुआ।

(g) सल्फर 1000- गन्दे और फटे कपड़े पहनकर सोचना कि बहुत अच्छे कपड़े पहिने

(h) बेलाडोना 1000- तीव्र उन्माद की दशा जोर-जोर से हँसना-रोना, अत्यन्त क्रोधी, आक्रामक, तोड़-फोड़ दूसरों पर थूकना, कुत्ते जैसा भौंकना।

6. आत्महत्या की प्रवृत्ति

अत्यन्त कल्पनाशील एवं भावुक स्त्रियों तथा पुरुषों दोनों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति पायी जाती है। मानसिक तनाव, आर्थिक समस्यायें, उदासी चिन्ता, बेचैनी चिड़चिड़ापन इस बढ़ती समस्या के प्रमुख कारण होते हैं।

(a) इग्नेशिया 200- भीषण अवसाद, दुःख शोक निराशा, रिक्तता की भावना, बेचैनी बीड़ी-सिगरेट का धुंआ बर्दाश्त नहीं, रोगी रूआंसा सा रहता है। बेचैनी उक्त औषधि 200 की तीन खुराक सप्ताह में दो बार दें।

(b) एटिम क्रूड 30- नहाना अच्छा नहीं लगता, चिड़चिड़ापन गर्मी बर्दाश्त नहीं, बात-बात में चिड़चिड़ापन, दूसरों की बातें बर्दाश्त नहीं होती है। 30 शक्ति की 3-4 गोलियाँ दिन में तीन बार दें।

(c) मेटालिकम औरम- अत्यन्त प्रभावी दवा है। जीवन में निराशा आत्मघात की प्रवृत्ति, परीक्षा में असफल, प्रेम में असफल होने, पति की मृत्यु पर गहन निराशा में यह आत्मघात की प्रवृत्ति धीरे-धीरे सूक्ष्म शरीर में प्रवेश कर जाती है और परिस्थितियाँ उत्पन्न होते ही व्यक्ति तत्काल आत्महत्या की ओर प्रवृत्त हो जाता है। आत्मघात की प्रवृत्ति के उपचार में यह सर्वोत्तम दवा है।

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