मधुमेह Diabetes

मधुमेह (Diabetes)

मधुमेह दो शब्दों की सन्धि से बना है जिसका अर्थ है मधु (शहद) अथवा शक्कर के समान मूत्र का विसर्जित होना। मधुमेह को डायबिटीज कहते हैं। प्रत्येक मनुष्य के रक्त में 100 घन सेन्टीमीटर में 80-120 मि. ग्राम तक शक्कर रहती है। शरीर में शक्कर को ग्रहण करने की लिए इन्सुलिन की जरूरत होती है, जब इसकी उचित मात्रा नहीं होती है तो शरीर शक्कर को ग्रहण नहीं कर पाता है और शक्कर मूत्र के साथ अधिक मात्रा में निकलने लगती है। यही मधुमेह है यह दो प्रकार का होता है।

1. शर्करायुक्त (Diabetes Melitus)

2. शर्कराहीन (Diabetes Insipidus)

होमियोपैथी की दवाइयाँ इस रोग में बहुत ही असरदार एवं लाभकारी होती है।

उपचार

(a) सिजियम जम्बोलीनिम Q- मूत्र में शर्करा की अधिक मात्रा, शारीरिक दुर्बलता, सिर में चक्कर आना, मुँह और त्वचा शुष्क।

(b) लैक्टिक एसिड 30- बहु मूत्र के साथ जोड़ों में दर्द।

(c) नेट्रम फास 30- अत्यधिक मूत्र स्राव, इसे सोते समय लें।

(d) नेट्रम सल्फ 30- रक्त दोष दूर करने हेतु।

(e) फॉस्फोरिक एसिड 30- मूत्र में फॉस्फेट और आक्सलेट विद्यमान होते

हैं, शरीर में कमजोरी, थकान और दर्द होता है।

(f) आर्सेनिक एलवम 30- ठण्ड अधिक लगती है, गर्म पदार्थों से आराम मिलता है, त्वचा और मुँह सूखा रहता है।

(g) अर्जेन्टम नाइट्रिकम 200- खुली हवा अच्छी लगती है, रोगी शंकालु,

यभीत, उत्सुक, कार्य में शीघ्रता करने की आदत।

(g) यूरेनियम नाइटिकम 31- मूत्र मार्ग में अधिक जलन का होना. भूखvका अधिक होना, अनजाने में पेशाब होना।

(h) रस ऐरोमिटेका 30- यह बहुमूत्र के लिए विशेष लाभकारी औषधि है।

(i) सेफालेण्ड्रा इण्डिका- हाथ-पैरों की जलन, पित्त की अधिकता दर्द तथा अतिसार, यह भी मधुमेह की प्रसिद्ध औषधि है। ध्यान रहे कि कोई भी होमियोपैथी दवा लेने के आधा घंटा पहले और तुरन्त बाद में कुछ भी न खायें।

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