बच्चों के रोग Diseases of Children

बच्चों के रोग (Diseases of Children)

1. कीड़े (Worms)

(a) सिना 3x, 30- नींद में दाँत पीसना, मीठी चीजें खाने की इच्छा, चेहरा पीला, नाभि के पास ऐंठन, मलद्वार में खुजली।

(b) कैलकेरिया कार्ब 6, 30- मलद्वारा में खुजली नाभि की ओर दर्द, चेहरा पीला।

(c) चेनोपोडियम 3X, 30- चिपटे तथा गोल दोनों तरह के कृमियों के लिए असरदार दवा है।

(d) क्यूकविटापेपो 3- लम्बे कृमियों को बाहर करने के लिए 5 बूंद की खुराक दिन में 3-4 बार देना चाहिए।

(e) नेट्रम फास 3X, 30- सब तरह के कृमि के उपचार हेतु असरदार दवा नाक कुरेदना, दाँत कड़कड़ाना तथा मलद्वार में खुजली।

(f) ग्रेनट्रम 3X, 30- नाक और मलद्वार में खुजली, नाभि के पास दर्द।

(g) मर्कसोल 6, 30- पतले दस्त, हमेशा खाते रहने की इच्छा, लार का निकलना, मलद्वार में तकलीफ।

(h) स्पाइजिलिया 6, 30- मुख से बदबू, नाभि के पास दर्द, सूत की तरह लम्बे बारीक कीड़े।

2. बिस्तर में पेशाब करना (Enuresis Bed witting)

(a) सीपिया 20- प्रथम निद्रा में ही इच्छा पेशाब कर देता है बदबूदार पेशाब, दुबला पतला बच्चा।

(b) थूजा 100- टीका लगने के बाद यदि बिस्तर गीला करने लगे।

(c) क्रियोजोटम 200- प्रथम निद्रा में बिस्तर पर पेशाब कर देना।

(d) कास्टिकम 200- मूत्राशय की नलियों का कमजोर होना।

(e) मूलेन आयल – यह भी इस रोग में बहुत ही असरकारी है।

3. मन्द बुद्धि बच्चे (Mongol Children)

ऐसे बच्चे आरम्भ से ही बहुत कम बुद्धि वाले होते हैं। आँखें अण्डाकार और फैली हुई होती हैं। ललाट चौड़ा तथा चपटा होता है। दृष्टि में तिरछापन या भैंगापन होता है। इनका शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। इनके शारीरिक और मानसिक विकास हेतु होमियोपैथिक दवाओं की भी सहायता लेना श्रेयस्कर होता है। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित तीन दवायें उपयोगी मानी गयी है।

(a) नेट्रम म्यूर 30- बच्चा यदि देर से बोले, कभी रोता है कभी हँसता है, चिड़चिड़ापन बहुत होता है और दुबला होता जाता है।

(b) कैलकेरिया कार्ब 30- यदि बच्चा देर से चलना प्रारम्भ करे, मोटा थुलथुला, सिर और पेट बढ़ा हुआ गर्दन और पैर पतले होते हैं।

(c) बेराइटा कार्ब 6, 30- बच्चे में शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध होते हैं, देर में चलना तथा देर में बढ़ना उसके प्राथमिक लक्षण होते हैं। हर काम देर से करने की आदत होती है।

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