ज्वर Fever बुखार

ज्वर रोग (Fever)

हमारे शरीर में जब भी तापक्रम 99 डिग्री फारेनहाइट से अधिक होने लगे तो समझें कि बुखार आ गया है। अगर बुखार 102 डिग्री तक चढ़ जाये तो भी ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। टायफायड, मलेरिया, फ्लू आदि में तो बुखार 104 डिग्री से 105 डिग्री तक जा सकता है, तब इसका तत्क्षण उपचार अत्यन्त आवश्यक होता है। वैसे बुखार को एक रोग न मानकर एक लक्षण माना गया है, जो किसी न किसी रोग के होने अथवा आने का संकेत देता है। इसलिए बुखार जब तक बहुत तेज न हो जाये तब तक यथा सम्भव इसके उपचार करने से बचना चाहिए। जब तक कि कोई अन्य लक्षण भी न दिखायी दे। वैसे जब अचानक तेज बुखार चढ़ आता है तो एकोनाइट या वेलाडोना का प्रयोग आरम्भ कर सकते हैं। प्रायः 30 पोटेन्सी की चार गोलियाँ हर दो घंटे बाद देना चाहिए और अगर सुधार न दिखता हो तो दवा देने का अन्तर बढ़ा दीजिए। इस पर भी यदि लाभ न प्रतीत हो तो दवा बदली जा सकती हैं। ध्यान रखें कि कम पोटेन्सी जैसे 6X 6C, 30X को बार-बार हर दो घंटे या चार घंटे पर देना चाहिए और उच्च पोटेन्सी जैसे 200X, 200C, IM अथवा इससे उच्च पोटेन्सी की मात्राएँ 24 घंटे में एक बार ही देनी चाहिए।

ज्वर के प्रकारः ज्वर के अनेक प्रकार होते हैं।

(क) कालाज्वर इसकी उत्पत्ति एक जीवाणु से होती है। एण्टिम टार्ट इस रोग की प्रधान दवा है, इसके अलावा आर्सेनिक 30, फॉस्फोरस 6, 30 आदि दवायें इसमें प्रयोग में लायी जाती हैं।

(ख) डेंगू ज्वर जिसे हड्डीतोड़ बुखार भी कहते हैं। इस ज्वर में मुख्य औषधियाँ एकोनाइट 3X तेज बुखार में, वायोनिया 6, 30, वेलाडोना 3, 6 आदि हैं।

मलेरिया ज्वर भी प्रायः पाया जाता है। रोगी को सबसे पहले एक खुराक सिनकोना दें, अगर 12 घंटे में फायदा न हो तो एक इपीकाक दें। 12 घंटे बाद फिर सिनकोना दें. अगर फिर भी फायदा न हो तो दूसरी दवा चुनें जैसे आर्सेनिक एलवम 30, 200, चायना 6, 30, एकोनाइट 3X, व्रायोनिया 30, रसटाक्स 30 आदि। तथा

(ग) मियादी बुखार आदि अनेक प्रकार के बुखार होते हैं।

बुखार में प्रभावकारी प्रमुख दवायें

(a) एकोनाईट 6, 30- सूखी ठण्डी हवा लगने के अथवा भय आदि के कारण बुखार का आना।

(b) सिना 300, 200- कृमि के कारण बुखार का आना।

(c) चायना 6, 30- सब तरह के बुखार।

(d) वायोनिया 30- गर्मी के दिनों में सर्दी लग जाने से बहुत ज्यादा पसीना, ठण्डा पानी पीने की इच्छा होती है।

(e) वेलाडोना 30- जोर का बुखार आँखें लाल, हाथ-पैर ठण्डे, तीव्र रदर्द का होना।

(e) आर्सेनिक 30- सब तरह के बुखार, बेचैनी बार-बार करवट बदलना, जलन, प्यास।

(1) आर्निका 200- किसी चोट लगने अथवा गिरने के कारण बुखार।

(g) डल्कामारा 30- बरसाती हवा लगने के कारण बुखार का आना।

(h) इग्नेशिया 200- शोक, दु:ख या आकस्मिक उत्तेजना के कारण बुखार का आना।

(i) इपिकाक 30- भोजन की अनियमितता के कारण बुखार।

(j) पल्सेटिला 30, 200- शाम के समय बुखार आना। खुली हवा में आराम महसूस करना।

(k) लाइकोपोडियम 30- सन्ध्या 4 बजे से रात को 8 बजे तक बुखार की तीव्रता का अनुभव करना।

(l) रस टाक्स 30, 200- किसी तरह का टाइफाइड बुखार।

(m) सल्फर 30, 200- ज्वर में चर्म सूखा, गर्मी का बहुत अधिक महसूस करना।

(n) नेट्रमम्यूर 30, 200- बुखार का 10 बजे से 11 बजे प्रातः आना। पसीना आने पर ज्वर का कम हो जाना।

(0) मर्क सोल 30, 200- रात और सुबह में ज्यादा बुखार आना, बदबूदार पसीना।

(p) फेरम-फास 12- चेहरा लाल, बहुत तेज बुखार, तेज सिरदर्द।

(q) पाइरोजिनम 200- तेज ज्वर का होना नब्ज तेज हो जाती है।

2.5 2 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x