छाती व फेफड़ों के रोग

फेफड़ों के रोग

फेफड़े के रोग के कई प्रकार होते हैं, जैसे- खाँसी, कूकरखाँसी ब्राकाइटिस, प्लुरिसी, छाती में पानी भर जाना आदि। सूखी खाँसी में एकोनाइट 30, वेलोडोना 30, वायोनिया 6-30, कैप्सिकम 6, कूकरखाँसी में एकोनाइट 30, वेलाडोना 30, ब्रोमिन 6X तथा सूखी सर्दी में एमोन कार्व 6X, सर्दी के साथ बेचैनी में आर्सेनिक, आजेण्टम नाइट 30 जाड़ा लगते रहना तथा सिर दर्द में तथा ब्राकाइटिस में एकोनाइट 3X, आर्सेनिक 30, व्रायोनिया 30 तथा बच्चों के लिए कैमोमिला 6 उपयोगी दवा है। वेलाडोना 6X,

1.दमा (Asthma)

यह बड़े उम्र के लोगों को अधिक होता है।

(a) ब्लाटा ओरिएटालिस मदर टिंचर- इस रोग की अमूल्य औषधि है।

(b) आर्सेनिक 30 एपिकाक 30- दमा के तेज दौरा आने पर दोनों पर्याय क्रम से अर्थात् एक के बाद दूसरी आराम मिलने तक देते रहें।

(c) एकोनाइट 200- एकोनाइट 200 की 8 बूंदें गरम पानी में डालकर इस मिश्रण को एक चम्मच प्रत्येक पाँच मिनट में पिलायें।

(d) इपिकाक 30, लैकेसिस 30-जैसा ऊपर बताया गया है कि आर्सेनिक एल्व 30 आदि प्रमुख औषधि है। ब्लाटा ओरिएण्टालिस मटर टिंचर इस रोग में बहुत ही असरकारी औषधि मानी गयी है। इसके अलावा अन्य उपयोगी औषधियों में सेनेबा मदर टिंचर एण्टिम टार्ट 30 जब छाती में कफ की धड़धड़ाहट बहुत अधिक हो तब देना चाहिए। दूसरी दवाओं के सेवन करते समय बीच-बीच में सल्फर 30 देते रहना बहुत लाभकारी होता है।

2. छाती में पानी भरना (Pleurisy)

फेफड़ों और छाती के अन्दर के भाग में सूक्ष्म और कोमल आवरण में पानी भर जाने से यह रोग होता है। लेटने में छाती में दर्द, खाँसी, हल्का बुखार, लाल चेहरा, सूजन आदि इस रोग के अन्य लक्षण होते हैं। इस बीमारी के उपचार में निम्न औषधियाँ प्रभावी मानी गयी है। इनमें 6 प्रमुख हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है।

(a) व्रायोनिया 30- भयंकर श्वास कष्ट, सिरदर्द, कब्ज तथ सुइया चुभोने जैसी पीड़ा।

(b) अर्निका 200- छाती की अस्थियों में झिझोड़ने वाली पीड़ा, सम्पूर्ण अंगों में दर्द तथा बार-बार करवट बदलने की इच्छा।

(c) आर्सेनिक 30- जल का एकत्रित हो जाना, छाती में तीव्र दर्द का होना शरीर शीतल अत्यधिक दुर्बलता और पीड़ा।

(d) एण्टिम टार्ट 6- कफ की अधिकता सिर में चक्कर एवं निद्रा की अधिकता।

(e) एकोनाइट 30- गरम शरीर, अधिक प्यास लगना, छाती में भीषण दर्द प्यास बहुत लगती है। श्वास लेने में बहुत कष्ट होता है।

(1) सल्फर 200- जब अन्य दवाओं से लाभ न होता हो तो इसे देना श्रेयस्कर होता है।

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