अपच (Dyspepsia) Homeopathological

अपच (Dyspepsia) Homeopathy treatment
भोजन पाचन क्रिया की गड़बड़ी ही अपच या बदहजमी है। पेट फूलना, कब्ज,
डकार आना बार-बार दस्त आना, छाती या गले में जलन पेट में भारीपन, भोजन के
बाद पेट में दर्द तथा सिरदर्द आदि इसके प्रधान लक्षण है। यह रोग प्राय: घी और
तेल की बनी चीजों का अधिक मात्रा में खाना, बिना चबाये भोजन निगल जाना तथा
बर्फ, शरबत, चाय, कॉफी अधिक मात्रा में तथा बार-बार पीने या खाने से होता है।
उपचार
(a) नक्सवामिका Nuxvomica 30- भोजन के पश्चात् पाचन स्थली में भार और दर्द
का महसूस होना, पेट फूलना, कच्ची डकारें आना, कलेजे में जलन
भोजन के बाद नींद व आलस्य आना, बार-बार मल त्याग करने की
इच्छा होना।
(b) नेटूमम्यूर Natrum Mur 12x- आलू मैदा की बनी भारी चीजों के खाने से तथा
अजीर्ण रोग में इस दवा को देने से विशेष लाभ होता है।
(c) पल्सेटिला Pulsatilla 6
सिर घूमना, मितली, सूखी जीभ, बार पतला या
आंव मिला दस्त, मुँह का स्वाद नमकीन सा होने पर।
(d) लाइकोपोडियम 200- नीचे की ओर वायु निकलना, पढ़ने-लिखने में
अधिकता के कारण तथा अपच होने के कारण।
(e) कार्बोवेज Carbo Veg 30- ऊपर की ओर वायु का निकलना पुराने बदहजमी में
तथा बूढों में अपच होने की दशा में यह अधिक लाभप्रद दवा मानी
गयी है।
(1) सिपिया Sipea 30- पुराने अजीर्ण रोग में विशेषकर जरायु रोग होने पर यह
दवा अत्यन्त उपयोगी होती है।

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