सूजन (जलोदर) – Dropsy | homeopathological treatment

सूजन (जलोदर) – Dropsy

किसी विशेष अंग जैसे सिर, हाथ, पेट पर सूजन होने को स्थानीय शोथ (Oedema) कहते हैं, सारे शरीर पर सूजन होने पर सर्वांगीण शोथ (anasarca) कहते हैं। 

 कारण : जिगर या तिल्ली का बढ़ना, मलेरिया, मासिक धर्म की गड़बड़ी, पुराना अतिसार,  आदि। पसीना, पेशाब या पाखाने का रुकना।

 लक्षण : सूजी हुई जगह नरम हो जाती है दबाने पर उस जगह गड्ढा पड़ जाता है जो धीरे-धीरे भरता है। प्यास, त्वचा खुश्क, अरुचि, पेशाब में लाली, सांस लेने में कष्ट, आदि।

 ● प्यास बिल्कुल नहीं। त्वचा खुश्क, पीली मोम जैसी; पेशाब बहुत थोड़ा। गर्मी में कष्ट बढ़ता है; ठंडक से आराम आता है। शरीर मे डंक मारने जैसा दर्द – (एपिस मेल 6 या 30) 

 ● तेज प्यास, पर पानी पीते ही उल्टी हो जाती है। ठंड अच्छी नही लगती – (एपोसाइनम Q) 

 ● कहीं भी सूजन होने पर उपयोगी – (थलास्पी बी. पी. Q) 

 ● गुर्दे में विकार आने की वजह से सूजन – (टैरेबिन्थ Q) 

 ● बेचैनी, परेशानी, प्यास ज्यादा। छाती, दिल, जिगर, तथा गुर्दे की बीमारी की वजह से सूजन – (आर्सेनिक एल्ब 30) 

 ● हृदय रोग के कारण सूजन, नाड़ी धीमी व कमजोर, पेशाब थोड़ा, काले रंग का, एल्बुमिन मिला हुआ। ठंडा पसीना – (डिजिटेलिस 30) 

 ● पेशाब या तो बहुत थोड़ा आता है या आता ही नहीं। मरीज बेहोशी में सोया रहता है; सब इंद्रियां शिथिल हो जाती है – (हैलेबोरस 6 या 30) 

 ● कमजोर करने वाली बीमारी के बाद सूजन – (चाइना 6) 

 ● किसी रुके या दबे हुए चर्म रोग के कारण सूजन – (सल्फर 30)

दवाएं आवश्यकतानुसार दिन में 2-3 बार दी जा सकती हैं।

 नमक खाना बंद कर देना चाहिए। हल्का और सादा भोजन लें।

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