सुखा रोग व शक्ति की कमी – Rickets and Marasmus

सुखा रोग व शक्ति की कमी – Rickets and Marasmus

● जब टांगें पहले पतली पड़ जाये और शरीर का उपरी हिस्सा बाद में – (एब्रोटेनम 30, दिन में 3 बार)

● जब सूखे रोग के कारण बच्चा बूढ़ा जैसा दिखने लगे – (एम्बेरा ग्रिजिया 30, दिन में 3 बार)

● अच्छा खाते पीते हुए भी कमजोरी महसूस हो, शरीर का उपरी हिस्सा (गर्दन) पहले पतला पड़े व निचला हिस्सा बाद में – (नैट्रम म्यूर 6 या 30, दिन में 3 बार)

● जब कमजोरी महसूस न हो लेकिन पूरा शरीर सूखता चला जाए – (आयोडियम 30 या 200, दिन में 2 बार)

● शरीर के सब अंग सूखने लगे, पेट फूल जाए – (सल्फर और कल्केरिया कार्ब 30 या 200, दिन में 2 बार)

● जब सुखा रोग में पेट अन्दर की ओर धंस जाये – (कल्केरिया फ़ॉस 6 या 6X, दिन में 4 बार)

● बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में सुखा रोग, पेट फूला हुआ – (नैट्रम फ़ॉस 6X या 30, दिन में 3 बार)

● असाध्य सुखा रोग में जब पेट फूला हो व नाभि के आसपास बहुत दर्द हो, कब्ज हो – (प्लंबम मेट 30 या 200, दिन में 2-3 खुराक)

● जब शारीरिक व मानसिक दोनों विकास नगण्य हो – (बैराइटा कार्ब – 200 या 1M)

● दुबले-पतले बच्चों में शक्ति की कमी, शरीर पर मांस न के बराबर, पेट कद्दू की तरह बड़ा, मांसपेशियां अपुष्ट, दूध न पचे – (साइलिशिया 30, दिन में 3 बार)

● माथा बड़ा और शरीर दुबला पतला , पोषण की कमी की वजह से दुबलापन और अस्थि विकार पेट अंदर धंसा हुआ, गर्दन बहुत पतली जो की सिर को न संभाल पाए, बालक मुर्ख सा दिखता हो – (कल्केरिया फ़ॉस 6 या 6X, दिन में 3 बार)

●  सिर बड़ा, खूब भूख, खाता भी है और कमजोरी भी रहता हो, झुर्रियां पड़ जाती है, चमड़ी लटकने लगती है – (सल्फर 30, दिन में 2 बार)

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