मासिक धर्म में विलंब – Amenorrhoea | homeopathological treatment

मासिक धर्म में विलंब – Amenorrhoea

यह दो तरह का होता है, (क) मासिक धर्म में प्राथमिक विलम्ब एवं (ख) मासिक धर्म में द्वितीयक विलम्ब l हमारे देश में बलिकायों को प्रायः 12-13 वर्ष की आयु तक मासिक धर्म शुरू हो जाता है, परन्तु कई बार युवावस्था आने पर भी मासिक (menses) नहीं होता, उसे मासिक धर्म में प्राथमिक विलम्ब कहा जाता है l कारण: वंशानुगत, पूर्ण रूप से शारीरिक विकास न होने या योनिच्छद झिल्ली में छिद्र न होने के कारण हो सकता है l जब मासिक एक बार शुरू होकर फिर रुक जाये तो उसे मासिक धर्म में द्वितीयक विलम्ब कहा जाता है l 

● प्राथमिक विलम्ब में, कन्या संवेदनशील व बात बात पर रो देती हो, गर्मी सहन न होती हो – (पल्साटिला30 या 200, दिन में 2-3 बार)

● स्वभाव चिडचिडा, उदासी, एकान्त में रहने की इच्छा, मासिक बहुत ही कम या बिलकुल बंद हो जाए l सफ़ेद पानी, कब्ज, योनि में भारीपन – (सीपिया 30 या 200)

● मासिक न होने पर सिर दर्द , ठंड लगना व कब्ज – (नैट्रम म्यूर 30, दिन में 3 बार)

● खून की कमी की वजह से मासिक न हो – (फैरम मैट 30, दिन में 3 बार)

●   डर या अचानक सर्दी लग जाने से मासिक न होना, बुखार, प्यास, व बेचैनी – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)

● मासिक धर्म न होकर नाक या मुंह से खून निकलने लगे – (ब्रायोनिया 30, दिन में 3 बार)

● कमजोरी के कारण मासिक धर्म न होना – (चाइना 30, दिन में 3 बार)

● दिल घबराना , पेट दर्द , मसूड़ों व गालों में सूजन , सफेद पानी – (काली कार्ब 30, दिन में 3 बार)

● अगर सही लक्षण के अनुसार दवा देने से भी लाभ न हो तो उस दवा के साथ सल्फर 200 या 1M की एक खुराक दें l

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x