पोलियो – Polio | homeopathological treatment

पोलियो – Polio

यह रोग प्रायः बच्चों को होता है। एक प्रकार के संक्रामक रोग के विष से उत्पन्न होता है। इससे मेरुदंड तथा मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। बुखार, खांसी, जुकाम, गला दुखना, कभी-कभी दस्त आना, ऐंठन होना आदि लक्षण होते हैं और फिर पक्षाघात हो जाता है। अगर रोक यही न रुके तो मृत्यु भी हो सकती है।

 ● पेट तथा आंतों में शक्तिहीनता के कारण बच्चा दूध पीते ही उसे ऐसे ही उलट देता है। हाथ पैरों में सुन्नपन। सिर को संभाले रहने कि व खड़े होने की शक्ति नहीं रहती। मुट्ठी भींच जाती है – (एथ्यूजा 30, दिन में 3 बार) 

 ● जब पोलियो के साथ सख्त कब्ज भी हो – (प्लम्बम मेट 30, दिन में 3 बार) 

 ● इन्फ्लूएंजा आदि बीमारियों के बाद जब अंगों में कमजोरी, टांगों में कड़ापन महसूस होता है। बहुत थकान, बच्चा सुस्त पड़ा रहता है। – (लैथाइरस 6, दिन में 3 बार) 

 ● टांगे सुन्न व झनझनाहट, चीटियां सी चलती है, रोगी बदन पर कपड़ा नहीं ओढ़ना चाहता – (सिकेल कोर 30, दिन में 3 बार)

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