जीभ के विकार – Affection of Tongue | homeopathological treatment

जीभ के विकार – Tongue affection of

●  जीभ मोटी व थुलथुली हो एवं उस पर दांतो के निशान पड़े हों, लार आए,  सफेद मैल जमी हो- (मर्क सॉल 30, दिन में 3 बार) 

 ● जब जीभ पर घाव हो जाए, खिचाव हो- (बोरेक्स Borax 30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● मुंह में व जीभ पर घाव; खून बहता रहे। मुंह से दुर्गंध आए- (एसिड सल्फ Acid Sulph 30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● जीभ बहुत लंबी  मालूम दे जैसे दातों में लग रही है। गले में घाव, मुंह बहुत सुखा, निगलने में परेशानी हो- (एथ्यूजा Ethuja 30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● जीभ पर घाव हो जो धीरे-धीरे गले में फैल जाए, जीभ बीच मे फटी हुई हो। लगातार खून मिला लार टपके। मुंह से बदबू आए- (एसिड नाइट्रिक Nitric Acid 30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● जीभ नक्शे की तरह चित्रित हो एवं ऐसा लगे जैसे कि जीभ पर बाल पड़ा है- (नैट्रम म्यूर Natrum Mur 30 या 200, दिन में 2 बार) 

 ● ऐसा लगे जैसे जीभ जली हुई है टपकन का सा दर्द महसूस हो- (बेलाडोना Beladonna30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● जीभ की नोक पर घाव हो- (फाइटोलक्का Phytolacca 30 या 200, दिन में 3 बार) 

 ● जीभ की नोक त्रिभुजाकार लाल रंग की हो- (रस टॉक्स Rhus Tox 30 या 200, दिन में 3 बार)

बोरिक एसिड Boric Acid 20 ग्रेन, 1 औंस ग्लिसरीन में मिलाकर जीभ पर बाहरी प्रयोग से लाभ होता है।

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