गुर्दे में या मूत्र पथरी – Renal Calculus | homeopathological treatment

गुर्दे में या मूत्र पथरी – Renal Calculus

शारीरिक क्रियाओं में गड़बड़ी होकर चूर्ण की तरह का पदार्थ गुर्दे या मूत्राशय में इकट्ठा होने लगता है। इसे ही मूत्र पथरी कहते हैं। जब यह खिसक कर मूत्र नली में आ जाता है तो रोगी असहनीय दर्द अनुभव करता है।

 लक्षण : पेशाब में रुकावट, बार-बार पेशाब होना, कभी-कभी पेशाब के साथ खून आना, असहनीय दर्द, जलन आदि।

 ● गुर्दे में असहनीय दर्द, खासकर जब दर्द बाईं तरफ हो और मूत्र द्वार तक फैले; बार बार पेशाब की इच्छा (दर्द दाईं ओर भी हो सकता है) – (बर्बेरिस वल्गेरिस Q, 5-10 बूंद, हर 15 मिनट के अंतर से या आवश्यकता अनुसार) 

 ● पुराने रोग में; पेशाब गाढ़े लाल रंग का, पेट में वायु की अधिकता, दाएं तरफ दर्द,  कभी कभी पेशाब में रुकावट – (लाइकोपोडियम 30, सुबह शाम दें) 

 ● मूत्र पथरी के दर्द में इतनी तकलीफ हो कि रोगी दर्द के कारण लेटने लगे, बूंद बूंद पेशाब आए – (पैरिआरा ब्रावा 30, दिन में तीन बार) 

 ● पेशाब में बहुत तेज जलन व दर्द; पेशाब गाढ़ा व  खून मिला। धुंधला, कालापन लिए हो – (टैरेबिन्थ Q, 5-5 बूंद, दिन में 3 बार) 

 ● पेशाब में सफेद चूर्ण, खासकर बाएं तरफ दर्द – (हाइड्रेंजिया Q, 5-10 बूंद, दिन में तीन बार) 

 ● पेशाब के अंत में असहनीय दर्द; खड़े होकर पेशाब करने से पेशाब आसानी से हो जाए। गर्म खाने पीने से तकलीफ बढ़े पर गर्म सेक से आराम हो – (सरसापैरिला Q या 6, दिन में तीन बार) 

 ● गुर्दे व मूत्राशय में सूजन; तेज कटने-फटने जैसा दर्द,  पेशाब मुश्किल से हो, पेशाब की जगह बूंद बूंद करके खून आए – (कैंथरिस 30, दिन में तीन बार) 

 ● बायोकेमिक औषधि – (मैग्नेशिया फॉस 6x, हर 2 घंटे बाद)

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