लकवा – Paralysis

लकवा – Paralysis

यह स्नायु संस्थान(nervous system) का रोग है। यह दो तरह का हो सकता है। संवेदनात्मक पक्षाघात(sensory paralysis) या प्रतिरोधक पक्षाघात(motor paralysis) – यह दोनों अलग-अलग या साथ-साथ भी हो सकते हैं।

 संवेदनात्मक पक्षाघात : इसमें रोगी की संवेदन शक्ति, जानने-पहचानने, काम करने की, शक्ति जाती रहती है। स्पर्श का ज्ञान नहीं रहता। अंग अपने आप हिलता रहता है।

 प्रतिरोधक पक्षाघात : इसमें रोगी अंगों को हिला डुला नहीं सकता, रोगी कुछ उठा नहीं सकता, चल फिर नहीं सकता।

 ● सारे शरीर में कमजोरी, भारीपन, मांस पेशियों की शिथिलता, सुन्नपन। भिन्न-भिन्न अंगों में समन्वय नहीं रहता, सारे अंग ढीले पड़ जाते हैं। – (जेल्सीमियम 30, दिन में 3 बार) 

 ● पैरों में स्पर्श का अनुभव नहीं होता। पिन चुभने पर भी दर्द नहीं होता। टांगे इतनी भारी हो जाती है कि उन्हें घसीट कर चलना पड़ता है। बैठे-बैठे टांगे भारी महसूस होती है। मेरुदंड के क्षय के कारण टांगों का पक्षाघात – (एल्युमिना 30, दिन में 3 बार) 

 ● जरा सा भी स्पर्श सहन नहीं होता। अंगों में डंक लगने और फाड़ने जैसी वेदनाएं। सुन्नपन, कुछ एक मांसपेशियों के पक्षाघात में उपयोगी, जैसे कलाई का झूल पड़ना(wrist drop), पैर का झूल पड़ना(foot drop) आदि। अत्याधिक कब्ज – (प्लम्बम मेट 30, दिन में 3 बार) 

 ● किसी भी प्रकार के पक्षाघात में उपयोगी। ज्यादातर दाईं तरफ का पक्षाघात। ठंडी हवा लगने से टाइफाइड या डिप्थीरिया के कारण पक्षाघात – (कॉस्टिकम 200, 2-3 खुराक हफ्ते में एक बार) 

 ● पक्षाघात जो क्रमशः नीचे से ऊपर के अंगों की तरफ जाता है। आंख बंद करते ही रोगी को पसीना आने लगता है। सिर को इधर या उधर करने में चक्कर आता है – (कोनियम 30, हर 2 घंटे बाद) 

 ● चोट लगने से पक्षाघात। काफी रोगी इस दवा से लाभ पाते हैं – (आर्निका 1M, 2-3 खुराक) 

 ● अगर रह्युमेटिज्म(rheumatism) के कारण टांगों में पक्षाघात हो।  बहुत बेचैनी हो वह रोगी हरकत करते रहना पसंद करें – (रस टॉक्स 30, दिन में 3 बार) 

 ● टांगों में बेहद अकड़ाहट। बैठते हुए रोगी टांग न  फैला सके। पिंडलियां अत्यधिक तनी हुई। रोगी सामने झुक कर बैठता है। कठिनाई से ही तन कर सीधा हो सकता है – (लैथाइरस 6 या 30, दिन में 3 बार) 

 ● आधे चेहरे का पक्षाघात। रोगी बोल नहीं पाता। रोगी को अपने चेहरे पर मकड़ी का जाला सा चिपका अनुभव होता है – (ग्रेफाइटिस 30, दिन में 3 बार)

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