न्यूमोनिया – Pneumonia

न्यूमोनिया – Pneumonia

 फेफड़ों के तंतुओं में सूजन हो जाने को न्यूमोनिया कहते हैं l  

  लक्षण : पहली या आरंभिक अवस्था में ठण्ड लगने के कारण फेफड़े में सूजन हो जाती है और सांस लेने में कष्ट होता है l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास आदि लक्षण होते हैं l दूसरी अवस्था में बलगम बनकर सारे फेफड़े में फ़ैल जाता है ; इस अवस्था में बलगम में खून भी आने लगता है और फेफड़ा कड़ा हो जाता है l यह अवस्था 4-18 दिन तक रह सकती है l तीसरी अवस्था: आराम होने की ओर बढ़ने वाली अवस्था l इसमें स्राव जज्ब (Absorb)होने लगता है तथा फेफड़ा पुनः काम करने लगता है l अगर स्राव जज्ब न हो तो रोगी मर भी सकता है l आरंभिक अवस्था में दवा देकर योग्य डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए l

● बीमारी की शुरू की हालत में जब कंपकंपी तेज हो l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास, डर व खुश्क खांसी हो – (एकोनाइट 30, हर आधे घन्टे पर)

● जब रोग रात में 12 बजे के बाद बढ़े, रोगी सुस्त हो, बेचैंनी महसूस करे व थोड़ा-थोड़ा पानी थोड़ी-थोड़ी देर के अंतर से पिये – (आर्सेनिक एल्ब 30, हर 2 घंटे पर)

● तेज बुखार के साथ बेहोशी, चेहरा तमतमाया लाल, ढके हुए अंगों पर पसीना; और खून का मस्तिष्क व छाती में जमाव हो – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)

●  जब बेचैंनी ख़त्म होने पर रोगी चुपचाप पड़ा रहे, हिलने-डुलने से रोग बढ़े, छाती में दर्द व दबाव महसूस हो, खासने से छाती व माथे में दर्द – (ब्रायोनिया 30, दिन में 4 बार)

● जब बलगम मवाद की तरह का हो, ठण्ड से रोग बढ़े, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3-4 बार)

● जब खूब पसीना आये मगर आराम न मिले, रोग रात में बढ़े – (मर्क सौल 30, दिन में 3-4 बार)

● सुखी खांसी, छाती में दर्द, खून मिला बलगम, ठंडा पीने की इच्छा l आखिरी अवस्था में – (फ़ॉसफोरस 30, दिन में 3-4 बार)

●  छाती में बलगम घड़घड़ाये मगर फिर भी न निकले; जीभ सफ़ेद – (एंटीम टार्ट 30 या 200, 2-3 खुराक)

● आखिरी अवस्था में जब रोगी ठंडा होने लगे, ठंडा पसीना आए – (विरेट्रम एल्ब 30, 15-20 मिनट पर)

 छाती को रुई से ढकना अच्छा है पर अनावश्यक रूप से कपड़े न लादें जायें l ठंडी हवा से बचाव करें l खाने पीने में हल्का व थोड़ा गर्म खाना दें l दलिया, कॉर्नफ्लेक्स, दूध, रोटी, गर्म दूध के साथ खजूर व बनफशा दूध में उबालकर देने से लाभ होता है l

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