दिल का दर्द – Angina pectoris

दिल का दर्द – Angina pectoris

यह दर्द दिल के अंदर के विकार के कारण नहीं, बल्कि मांशपेशियों व स्नायुमंडल में हुई गड़बड़ी के कारण होता है। ज्यादा शराब के सेवन से, मानसिक परेशानियों,  बीड़ी-सिगरेट,  वातरोग, आदि से भी हो सकता है। दिल में एकाएक दर्द उठकर छाती के सामने वाले भाग, बाएं कंधे व बाजू तक फैल जाता है। सांस जल्दी-जल्दी आने लगता है, घबराहट, पसीना, बेहोशी तक हो जाती है। समय पर ठीक उपचार ना मिलने पर रोगी की मृत्यु तक हो सकती है।

● मुख्य औषधि – (लैट्रोडेक्टस 6 या 30, दिन में 3 बार)

●  जब हृदय की गति बहुत तेज हो। बाईं ओर घूमने से हृदय में सुई चुभने जैसा दर्द हो  – (आइबेरिस Q, 5-10 बूंद)

●  जब लगे कि हृदय काम करना ही बंद कर देगा – ( डिजिटेलिस Q या 30, दिन में 4 बार)

● जब दर्द के कारण बाईं ओर न लेटा जाए – (स्पाइजिलिया 30, दिन में 4 बार)

●  हृदय को ताकत देने के लिए – (कैक्टस Q व क्रेटेगस Q, पानी मे मिला कर)

● जब अत्यधिक बेचैनी, कमजोरी, प्यास व जलन हो; ऐसा लगे जैसे कि प्राण निकलने ही वाले हैं – ( आर्सेनिक 30, हर 15-20 मिनट बाद)

●  जब पेट में वायु के दबाव के कारण हृदय दर्द हो, रोगी खुली हवा या पंखा चाहे – ( कार्बोवेज 30, दिन में 3 बार)

●  जब दर्द हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने के कारण हो – (स्ट्रोफैन्थस Q, दिन में 3 बार)

●  जब दर्द के कारण रोगी गश खा जाए, बायां हाथ सुन्न हो जाए – (नाजा 6 या 30, दिन में 3-4 बार)

●  बायोकेमिक औषधि – ( मैग्नीशिया फॉस 6X व काली फॉस 6X)

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