दमा – Asthma

दमा – Asthma

फेफड़े में हवा ले जाने वाली नालियों (Bronchi) तथा फेफड़ों (Lungs)में जब श्लेष्मा (Mucous)जमा हो जाता है, निकाले नहीं निकलता, सांस मुश्किल से आता है, छाती से सांय सांय की आवाज आती है, सीटियां सी बजती हैं, रोगी हवा के लिए तरसता है, अक्सर रात में कष्ट बढ़ता है l

 कारण : मानसिक उत्तेजना, कब्ज, वात,धूल, या धुएं भरे वातावरण में रहना l ज्यादा मात्रा में ख़राब भोजन करना l यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है l

●  एकाएक तेज दमे का आक्रमण (acute attack) l रोग के शुरू में – जब बेचैनी व मितली हो l – (एकोनाइट Q, इपिकैक Q, 10-10 बूंद पहले 1 घंटे के अंतर से अदल-बदल कर व आराम आने पर 3-3 घंटे के बाद दें)

●  जब रात के 12 बजे रोग बढ़े, बेचैंनी व प्यास अधिक हो – (आर्सेनिक एल्ब 6 या 30, दिन में 4 बार)

●   दमा के प्रकोप को कम करने के लिए, जब दम घुटे, सांस ठीक से न ली जाय – (ब्लैटा ओ Q, सेनेगा Q, ग्रिंडीलिया Q व कैशिया सोफोरा Q बराबर मात्रा में मिला कर दें )

● मितली, कलेजे में संकुचन, दम घुटे, जीभ साफ़ हो – (इपिकैक 6 या 30, 2-2 घंटे के बाद)

●   सोने से तकलीफ बढ़े, श्लेष्मा निकलने से आराम आए l प्रौढ़ स्त्रियों में रजःस्राव बंद होने के समय दमा – (लैकेसिस 30, 3-3 घंटे के बाद)

●  थोड़ी देर सोने के बाद तकलीफ बढ़े – (अरेलिया रेसिमोसा Q या 30, दिन में 3 बार)

● रोग जब अंग्रेजी दवा(steroids etc) लेने के बाद आए, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (थूजा 1M या 200)

●  जब इओसिनोफिल्स की मात्रा बढ़ जाए l सांस फूलने लगे – (थायरोएडिन 200 या 1M व लैकेसिस 30)

●  वाहनों के धुंए या इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से रोग हो या बढ़ता हो – (एसिड सल्फ्यूरोसम 30, दिन में 3 बार)

●  जब रोगी सिर्फ खड़ा रह कर सांस ले सके – (कैनाबिस इंडिका 200 या 1M)

●  सूती कपड़ा बुनने व रुई धुनने वाले मजदूरों में – (गौसिपियम 30, दिन में 3-4 बार)

●  पत्थर तोड़ने वाले मजदूरों में – (साइलिशिया 30, दिन में 3-4 बार)

● फूलों की खुश्बू से – (ऐलेन्थस जी. 30, दिन में 3-4 बार)

●   गुस्से की वजह से रोग बढ़े – (कैमोमिला 200 या 1M)

●  मल्लाहों का दमा, जहाज पर समुद्र में रहने से ठीक रहे और समुद्र तट पर आने से उभर आए – (ब्रोमियम 30, दिन में 3 बार)

●  मानसिक तनाव या अशांति के कारण, धुएं से बढ़े – (इग्नेशिया 200 या 1M)

●  बायोकैमिक दवा – (मैग्नीशिया फॉस 6X व काली फ़ॉस 6X अदल-बदल कर 3-3 घंटे के बाद)

मांस-मछली, दूध, सफ़ेद चीनी, केक, पेस्ट्री, मैदा के बिस्किट, सफ़ेद डबल रोटी, व मैदा से बनी चीजें न दें l आटा मोटा पिसा इस्तेमाल करें l शहद, सलाद, ताजी सब्जियां, उबला अंडा, पनीर आदि इस्तेमाल करें l रात का भोजन कम व सांयकाल ही कर लें l

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x