जोडों का दर्द, गठिया व वात रोग – Gout, Rheumatism and Arthritis

जोडों का दर्द, गठिया व वात रोग – Gout, Rheumatism and Arthritis

जोड़ के दर्द दो तरह के होते हैं l छोटे जोड़ों के दर्दो को गठिया कहते हैं, इन जोड़ों का दर्द जब काफी पुराना हो जाता है तब जोड़ विकृत यानि टेढ़े – मेढ़े हो जाते हैं तब इसे पुराना संधि प्रदाह (arthritis deformans) कटे हैं l बड़े जोड़ों तथा पुट्ठे के दर्दो को वात रोग (rheumatism) कहते हैं l वात रोग (gout) में जोड़ों की गांठें सूज जाती है, बुखार हो जाता है, बेहद दर्द और बेचैनी होती है l कारण : ओस या सर्दी लगना, देर तक भीगना, अधिक मांस, खटाई या ठंडी वस्तुएं खाना, शराब का अधिक सेवन करना व विलासिता, आदि l

●  अर्टिका युरेन्स Q – मुख्य दवा l जब पेशाब में यूरिक एसिड व युरेट्स काफी मात्रा में आये – (10 बूंद दिन में 3 बार)

● कोल्चिकम 30-  छोटे जोडों में दर्द व सुजन, दर्द कटने या चुभने जैसा; रात में या चलने फिरने से बढ़े – (दिन में 3 बार)

● पल्साटिला 30- जब दर्द एक जोड़ से दुसरे जोड़ में चलता-फिरता रहे – (दिन में 4 बार)

●  लीडम पाल 30- रोग खासकर पैर के अंगूठे में सूजन के साथ l ठण्ड या बर्फ की पट्टी से रोग घटे l दर्द नीचे से ऊपर की ओर जाये – (दिन में 4 बार)

●  एकोनाइट 30- जब रोग अचानक ठंड के कारण शुरू हो – (दिन में 4 बार)

● सल्फर 30- जब गठिया रोग चर्म रोगों के साथ शुरू हो – (दिन में 3 बार)

● रस टक्स 30 या 200- जब रोग ठण्ड से बढ़े l सेकने व चलने फिरने से आराम आये – (दिन में 3 बार)

●   कल्केरिया कार्ब 30 या 200- मौसम बदलने के साथ रोग की पुनरावृत्ति – (दिन में 3 बार)

●  स्टेफिसेगिरिया 30 या 200- हाथ पैर के छोटे छोटे जोड़ों में दर्द  व सूजन – (दिन में 3 बार)

● शराबियों में जोड़ों का दर्द – (नक्स वोमिका 30 या 200, दिन में 3 बार)

● स्टैलेरिया मीडिया Q,- जब दर्द स्थान बदलता रहे l हिलने डुलने से रोग बढ़े – (दिन में 3 बार)

●  लाइकोपोडियम 30,- अंगुलियों के जोडों का दर्द – (दिन में 3 बार)

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