कृमि – Worms

कृमि – Worms

कृमि या पेट में कीड़े तीन प्रकार के होते हैं।

 (1) छोटे सूत की तरह (Small thread worms) : ये इकट्ठी मलद्वार के पास रहते हैं, कभी मूत्र नली या योनि में भी चले जाते हैं और वहाँ खुजली होने लगती है, जलन भी होती है।

 लक्षण : सांस में बदबू, पाखाने के समय तकलीफ, नाक में खुजली, नींद में दाँत किटकिटाना, गुदा में बराबर खुजली रहने से नींद भी नहीं आती।

  (2) गोल कृमि (Round worm) : ये केचुए की तरह, सफेद होते हैं, छोटी आंत में रहते हैं। कभी उल्टी के साथ, कभी पाखाने के साथ निकलते हैं।

 लक्षण : पेट फूलना, पेट दर्द, दाँत किटकिटाना, नींद में चीखना, नाक खुजाना, चेहरा पीला, शरीर दुबला, भूख अधिक, या खाने में अरुचि आदि।

  (3) फीता कृमि (Tape worm) : सफेद चपटे, यह कृमि छोटी आंत में रहता है।

  ● कृमि रोग की मुख्य दवा। यह हर तरह के कृमि के लिए इस्तेमाल होती है; बच्चों में चिड़चिड़ापन, हमेशा खाते रहना चाहे – (सिना 30, दिन में 3 बार) 

 ● गोल कृमि की मुख्य दवा – (सैंटोनिन 1X या 3X साथ मे मर्क डल 1X दिन में 4 बार) 

 ● फीता कृमि की मुख्य दवा – (क्युप्रम ऑक्सिडेटम नाइग्रम 1X या 3X, दिन में 4 बार, साथ मे नक्स वोमिका Q, 5-5 बूंद दिन में 3 बार) 

 ● सूत कृमि की मुख्य दवा – (सिना Q या 30, दिन में 4 बार) 

 ● बायोकैमिक औषधि – (नैट्रम फॉस 6X, दिन में 4 बार)

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