काली खांसी – Whooping Cough

काली खांसी – Whooping Cough

श्वासतंत्र, स्वरतंत्र की सूजन और साथ ही स्वरनली में अकड़न हो और और खांसी आए तो उसे काली खांसी कहते हैं l

लक्षण: शुरू में हल्का सा बुखार, छींके, जुकाम, व आंखो से पानी; बाद में खांसी के दौरे पड़ने लगते हैं l खांसते खांसते सांस रुक जाता है, चेहरा लाल या नीला l आंखे लगता है की निकल पड़ेगी, नसें फूल जाती है और थोड़े समय के अन्दर ही खांसी प्राणघातक रूप धारण कर लेती है l यह बच्चों की जानलेवा बीमारी है l

● रोग की शुरू अवस्था में ; जब काफी बेचैंनी हो – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे बाद)

● चेहरा लाल हो, सिर दर्द हो l शरीर की उपरी भाग में रक्त का जमाव हो – (बेलाडोना 30, 2-3 घंटे पर)

● जब ठण्ड लगने के कारण खांसी हो, गले में मछली का कांटा फंसने जैसा आभास हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 4 बार)

●  जब बलगम गाढ़ा व तार की तरह खिंचने वाला हो; सुबह के समय ज्यादा हो – (काली बाई 30, दिन में 4 बार)

●  जब नींद में या नींद के बाद रोग बढ़ता हो l गले के पास कपड़ा तक न सुहाए – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)

● जब गले के अन्दर आरी चलने जैसी आवाज हो और कुत्ता खांसी हो – (स्पोंजिया 6 या 30, दिन में 3 बार) 

पुराने रोग में सिफिलिनम 1M की एक खुराक देकर परटूसिन 1M की एक खुराक अगले दिन दें और फिर उपरोक्त दवाओं में से लक्षण के अनुसार जो दवा उचित समझें दें l ड्रोसेरा Q, 5 बूंद और जस्टिशिया Q, 5 बूंद अदल-बदल कर गर्म पानी में लेने से जल्दी फायदा होता है l

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